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अन्ना आंदोलन में सक्रिय हुए , विवाद में भी नाम आया

स्वामी अग्निवेश 

 स्वामी अग्निवेश जिंदगी भर समाज सुधारों के लिए समर्पित रहे । उन्होंने 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी गठित की और 1977 में हरियाणा सदस्य भी बने लेकिन सामाजिक कुरीतियों और परंपराओं को लेकर उनके मन में टीस हमेशा से थी यही वजह है कि 1981 में राज्य के शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्हें बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाया औरहजारों लोगों को इससे मुक्ति दिलाकर नई जिंदगी दी ।


 हालांकि उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया । बंधुआ मजदूरों पर जब गोलियां चलाने के मामले में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने जब पुलिस कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया । आंदोलनों के कारण विधानसभा के उनकी दो बार गिरफ्तारी भी हुई और उन्होंने 14 माह जेल में भी बिताए । हत्या और धर्म परिवर्तन जैसे कई आरोप उन पर लगे , लेकिन वह बरी हुए । 




आर्य समाज से जुड़कर संन्यासी हुए : 

आंध्र प्रदेश में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे अग्निवेश ने युवावस्था में ही अपनामूलनाम , जाति , धर्म और परिवार का त्याग कर दिया । वह वर्ष 1968 में हरियाणा आकरआर्य समाज में शामिल हुए और अपनी सारी संपत्ति भी दानकर संन्यासी की जिंदगी बिताने लगे । वर्ष 1974 में वैदिक समाजवाद नाम से किताब लिखी । अग्निवेशने आतंकवाद से प्रभावित कश्मीर में शांति कायम करने के कई अभियानों से भी जुड़े ।

अन्ना आंदोलन में सक्रिय हुए , विवाद में भी नाम आया

किसी भी दल के प्रति झुकाव नहीं रखने वाले स्वामी अग्निवेश वर्ष 2011 में समाजसेवी अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़ गए । हालांकि , कांग्रेस सरकार के एक मंत्री के साथ बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद वह अन्ना आंदोलन से अलग हो गए । इसके बाद रियलटी टीवी शो बिग बॉस में भी वह नजर आए । वह लंबे समय तक आर्य समाज की विश्व परिषद के अध्यक्ष रहे । वहीं , जम्मू - कश्मीर में बाबा अमरनाथ पर उनकी टिप्पणी को लेकर उन्हें हिन्दू संगठनों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी ।


महत्वपूर्ण तिथि- 

21.09.1939 से 11.09.2020 जीवन काल

1970 में सन्यासी हो गए आर्य समाज से जुड़ने के दो साल में 


1977 मे हरियाणा विधानसभा में विधायक , दो साल बाद मंत्री बने

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